Basoda Jain Samaj: रीवा हादसे पर गंजबासौदा में निकाला गया मौन जुलूस, सड़कों पर उतरा जैन समाज
Ganj Basoda Jain Samaj: मध्य प्रदेश के रीवा में विगत २० मई को पदविहार कर रहीं पूज्य आर्यिका माताजी संघ के साथ घटित हुए संदेहास्पद और भीषण हादसे को लेकर पूरे भारत के जैन समाज में गहरा आक्रोश और तीव्र वेदना व्याप्त है। इस दर्दनाक घटना के विरोध में आज पूरे देश में एक साथ, एक समय पर लाखों जैन श्रद्धालुओं ने सड़कों पर उतरकर अपनी ताकत और नाराजगी का अहसास कराया। इसी कड़ी में ‘सकल जैन समाज गंजबासौदा’ के आह्वान पर नगर में एक ऐतिहासिक और विशाल मौन जुलूस निकाला गया। समाज ने इस पूरी घटना को महज एक दुर्घटना मानने से इंकार करते हुए इसे ‘क्रूर हत्या’ करार दिया है और राष्ट्रपति के नाम स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” लागू करने की हुंकार भरी है।
काली पट्टी बांधकर सड़कों पर उतरा जनसैलाब
गंजबासौदा में आयोजित इस देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जहाँ जैन समाज की महिलाएं, पुरुष, प्रबुद्धजन और हजारों की संख्या में युवा वर्ग एक सुर में शामिल हुए। सबसे पहले स्थानीय स्तर पर एक विशाल श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसके बाद ‘भगवान महावीर विहार’ से मौन जुलूस शुरू हुआ। जुलूस में शामिल सभी समाजजन अपने हाथों और बाहों पर काली पट्टियां बांधकर मूक विरोध दर्ज करा रहे थे। यह मौन जुलूस भगवान महावीर मार्ग से प्रारंभ होकर नगर के विभिन्न प्रमुख चौराहों और मुख्य बाजारों से होते हुए स्थानीय लाल परेड ग्राउंड स्थित एसडीएम कार्यालय पहुंचा।
राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
लाल परेड ग्राउंड पर जुलूस के तब्दील होने के बाद जैन समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने देश की महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक कड़ा और विस्तृत ज्ञापन स्थानीय एसडीएम (SDM) अनुभा जैन को सौंपा। इस ज्ञापन में जैन समाज ने केंद्र और राज्य सरकार के सामने 5 मांगें रखी हैं।
1 — रीवा कांड की उच्चस्तरीय जांच: २० मई को रीवा में पदविहार कर रहीं पूज्य आर्यिका श्रुतमति माताजी एवं आर्यिका उपशममति माताजी को पीछे से टक्कर मारने वाले इस पूरे प्रकरण की सीबीआई (CBI) या एसआईटी (SIT) से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
2 — फांसी की सजा की मांग: समाज ने दो टूक शब्दों में मांग की है कि अहिंसक साध्वियों की हत्या करने वाले आरोपी को किसी भी सूरत में बख्शा न जाए और उसे अदालत से कठोरतम दंड यानी फांसी की सजा दिलाई जाए।
3 — विहार के दौरान पुलिस सुरक्षा (SOP): भारत भर में जब भी कोई जैन मुनि या आर्यिका संघ पैदल विहार करे, तो स्थानीय पुलिस प्रशासन को अनिवार्य रूप से उन्हें सुरक्षा घेरा (Pilot/Escort) प्रदान करना होगा।
4 — “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” कानून: केंद्र सरकार संसद में कानून बनाकर पैदल विहार करने वाले देश के सभी तपस्वियों के लिए एक स्थाई राष्ट्रीय नीति और गाइडलाइन लागू करे।
5 — संवेदनशील श्रेणी में हो अपराध: चूंकि जैन संत पूर्णतः निहत्थे और अहिंसक होते हैं, इसलिए उनके खिलाफ होने वाली किसी भी हिंसा या लापरवाही को ‘विशेष संवेदनशील अपराध’ (Special Sensitive Category) की श्रेणी में रखकर फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाया जाए।
पूरे भारत में एक साथ थमी जैन समाज की सांसें
गंजबासौदा के जैन नेताओं ने बताया कि यह आंदोलन सिर्फ एक शहर का नहीं है। आज कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत के हर छोटे-बड़े शहर में जैन समाज ने अपनी दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखकर मौन जुलूस निकाला है। यदि सरकार ने संतों की चर्या को सुरक्षित बनाने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए, तो संपूर्ण भारत का जैन समाज सड़कों पर उतरकर उग्र (परंतु अहिंसक) आंदोलन करने को मजबूर होगा।



