Bhagwat Katha: भू-वैकुंठ बद्रीनाथ धाम में भागवत ज्ञान यज्ञ का शंखनाद, निकली कलश यात्रा
गंजबासौदा: हिमालय की कंदराओं और ऊंची वादियों में विराजमान सनातन आस्था के सर्वोच्च केंद्र श्री बद्रीनाथ धाम इन दिनों पूरी तरह भागवतमय हो उठा है। इस पावन तीर्थ पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का अत्यंत भव्य और दिव्य शुभारंभ हुआ है। अलकनंदा नदी के पवित्र तट से शुरू हुई इस भव्य कलश यात्रा में सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु सिर पर मंगल कलश धारण कर, भक्ति गीतों पर झूमते और जयकारे लगाते हुए मुख्य बाजार से होकर कथा पंडाल तक पहुंचे। इस धार्मिक आयोजन से पूरा बद्रीनाथ क्षेत्र अलौकिक आध्यात्मिक उल्लास और हरिनाम संकीर्तन से गूंज उठा है।

9 जून तक बहेगी रसधारा
इस भव्य कथा महोत्सव का आयोजन इंदौर निवासी कांजी भाई अग्रवाल एवं श्रीमती संतोष अग्रवाल के सान्निध्य में किया जा रहा है। वहीं, कथा के मुख्य यजमान के रूप में हितेश अग्रवाल एवं दीपाली अग्रवाल अपने पूरे परिवार के साथ वेदी पूजन और धार्मिक रीतियों का निर्वहन कर रहे हैं। भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की सीख देने वाला यह भागवत ज्ञान यज्ञ आगामी 9 जून 2026 तक जारी रहेगा, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त भगवान बद्रीविशाल के दर्शनों के साथ-साथ कथा श्रवण का पुण्य लाभ उठा रहे हैं।

वैकुंठ है बद्रीनाथ धाम: कथाव्यास भार्गव
कथा के पहले दिन गंजबासौदा नगर के गौरव और प्रख्यात राष्ट्रीय कथाव्यास पंडित देवेंद्र भार्गव ने व्यासपीठ से बद्रीनाथ क्षेत्र की अलौकिक महिमा का शास्त्रोक्त वर्णन किया। पंडित भार्गव ने कहा कि शास्त्रों और पद्मपुराण में अलकनंदा को स्वर्ग की दिव्य धारा बताया गया है। नारायण पर्वत, नीलकंठ पर्वत और महान ऋषियों की इस तपस्थली पर साक्षात भगवान नारायण ने खुद कठोर तप किया था। ऐसी भूमि पर भागवत कथा सुनना किसी भी मनुष्य के लिए जीवन का सबसे बड़ा और दुर्लभ सौभाग्य है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को समझाया कि जहां भगवान विष्णु साक्षात निवास करते हैं, वही वैकुंठ है और धरती पर उसका प्रतिरूप बद्रीनाथ धाम है। इसलिए इस ‘भू-वैकुंठ’ में किया गया थोड़ा सा भी जप, तप, दान, भजन और दर्शन सामान्य स्थानों की तुलना में अनंत गुना अधिक फलदायी और पुण्य देने वाला होता है।

देशभर से पहुंचे भक्त
इस कथा महोत्सव की खास बात यह है कि इसमें मध्य प्रदेश के गंजबासौदा नगर सहित देश के कई बड़े महानगरों के श्रद्धालु बद्रीनाथ पहुंचे हैं। जिसमें समाजसेवी गणेशराम रघुवंशी, पूर्व मंडी सचिव किशन अग्रवाल, रघुवीर सिंह रघुवंशी (कालापाठा) इनके साथ ही इंदौर, पुणे, मुंबई, भोपाल, ब्यावरा और राजगढ़ सहित अनेक शहरों से आए श्रद्धालु अलकनंदा के कल-कल निनाद और शीतल हवाओं के बीच इस अलौकिक और दिव्य आध्यात्मिक अनुभूति से ओतप्रोत महसूस कर रहे हैं।



