Dharmendra Bhargava: कथावाचक पंडित धर्मेंद्र भार्गव को मिली भोपाल संभाग उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी
Pandit Dharmendra Bhargava: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के शिवाजी नगर स्थित श्री परशुराम मंदिर परिसर में आयोजित श्री भृगु भार्गव ब्राह्मण समाज मध्य प्रदेश के भव्य जिला एवं संभाग कार्यकारिणी गठन सम्मेलन में एक बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया गया है। गंजबासौदा नगर के सुप्रसिद्ध शिव महापुराण कथा वाचक पंडित धर्मेंद्र भार्गव को सर्वसम्मति से भोपाल संभाग का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
जैसे ही सम्मेलन के मुख्य मंच से उनकी नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा की गई, पूरा परिसर करतल ध्वनि और भगवान परशुराम के जयकारों से गूंज उठा। गंजबासौदा सहित पूरे संभाग के भार्गव समाज ने इस नियुक्ति पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे संगठन की मजबूती के लिए एक मील का पत्थर बताया है।

शिव चौबे और रमाशंकर चौधरी की मौजूदगी में गठित हुई नई टीम
भोपाल में संपन्न हुए इस राज्य स्तरीय महासम्मेलन में समाज के कई शीर्ष चेहरे और कद्दावर राजनैतिक-सामाजिक हस्तियां मंचासीन रहीं। कार्यक्रम में पूर्व राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त वरिष्ठ नेता शिव कुमार चौबे, रमाशंकर चौधरी सहित समाज के प्रबुद्ध जन विशेष रूप से उपस्थित रहे। सम्मेलन के दौरान पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करते हुए भोपाल जिले के लिए 38 पदाधिकारी और भोपाल संभाग के लिए 27 नवनियुक्त पदाधिकारियों की कार्यकारिणी का गठन किया गया।
अधिसूचना पत्र का वितरण
भृगु भार्गव ब्राह्मण समाज के प्रदेश महासचिव डॉ. अनिल भार्गव (वायु) ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को उनके दायित्व का आधिकारिक अधिसूचना पत्र और नियुक्ति पत्र सौंपकर संगठन के प्रति निष्ठा की शपथ दिलाई।

शिक्षक परसराम दुबे और अमित चतुर्वेदी की देखरेख में हुआ निर्विरोध चुनाव
इस पूरी सांगठनिक निर्वाचन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए गंजबासौदा नगर के शिक्षक पं. परसराम दुबे ने मुख्य जिला एवं संभाग निर्वाचन अधिकारी की कमान संभाली। वहीं सहायक निर्वाचन अधिकारी के रूप में सह-सचिव अमित चतुर्वेदी ने उनका सहयोग किया। पूरी निर्वाचन प्रक्रिया बेहद शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुई।
कौन है पं. धर्मेंद्र भार्गव?
बता दें कि नवनियुक्त संभाग उपाध्यक्ष पंडित धर्मेंद्र भार्गव सिर्फ विदिशा जिले में ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में अपनी ओजस्वी वाणी और ‘शिव महापुराण’ के सरस कथा वाचन के लिए एक विशिष्ट पहचान रखते हैं। वे भगवान आशुतोष के बड़े-बड़े अनुष्ठानों, सामूहिक रुद्राभिषेक और धार्मिक प्रकल्पों के माध्यम से लंबे समय से नई पीढ़ी को सनातन संस्कारों से जोड़ने का काम कर रहे हैं। उनकी कथा शैली में शिव भक्ति के साथ-साथ राष्ट्र चेतना, पारिवारिक संस्कार और सामाजिक समरसता का अद्भुत समावेश रहता है, जिसके चलते वे युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।



