Naulakhi Dham Mahayagya: गंजबासौदा नौलखी धाम में संपन्न हुआ शतचंडी महायज्ञ
Naulakhi Dham Shatchandi Mahayagya: पुरुषोत्तम मास के परम पावन उपलक्ष्य में वेत्रवती (बेतवा) नदी के पावन तट पर स्थित सुप्रसिद्ध नौलखी धाम तपोवन आश्रम के विजय हनुमान मंदिर परिसर में पिछले 9 दिनों से चल रहे आध्यात्मिक अनुष्ठान का भव्य समापन हो गया। धर्म नगरी गंजबासौदा में साधना और सनातन चेतना का दिव्य केंद्र बने नौलखी धाम में नवदिवसीय विराट शतचंडी महायज्ञ, दुर्गा सप्तशती पाठ और माँ भगवती के महापूजन की पूर्णाहुति अत्यंत हर्षोल्लास और भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुई।

शंखनाद, वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की कर्णप्रिय ध्वनि के बीच जैसे ही यज्ञ की अंतिम आहुति दी गई, पूरा परिसर “जय माता दी” और “हर-हर महादेव” के गगनभेदी उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। यह भव्य और विशेष अनुष्ठान नौलखी धाम में प्रस्तावित ‘भव्य पाषाण शिवालय’ (शिव मंदिर) के निर्माण के महासंकल्प और विश्व कल्याण की पावन भावना को लेकर आयोजित किया गया था।

कमल पुष्प और गुगल से महका मंडप
इस ९ दिवसीय महायज्ञ में पवित्रता, सात्विकता और शास्त्रोक्त शुद्धता का विशेष प्रबंध किया गया था, जिसकी महक पूरे क्षेत्र में फैल गई। महायज्ञ की विशेष पूर्णाहुति के लिए विशेष रूप से पीतांबरा पीठ की नगरी दतिया से १०८ पवित्र कमल के फूल मंगाए गए थे, जिन्हें मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ भगवान को समर्पित किया गया। वही हवन कुंड में आहुति के लिए गुजरात से विशेष रूप से शुद्ध औषधीय गुगल मंगवाया गया था, जिसकी सुंगध से पूरा तपोवन आश्रम महक उठा। पूरे अनुष्ठान में केवल देशी गाय के शुद्ध घी और दुर्लभ जड़ी-बूटियों से युक्त हवन सामग्री का ही उपयोग किया गया, जिससे पूरे वातावरण में सकारात्मक और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।

श्रीमहंत राम मनोहर दास जी के सान्निध्य में जुटे यजमान
नौलखी धाम के श्रीमहंत श्री राम मनोहर दास जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित इस अनुष्ठान के समापन दिवस पर विशेष पीठ पूजा, श्रीसूक्त पाठ और षोडशोपचार विधि से जगदम्बा का अर्चन किया गया। यज्ञ की अग्नि में बेलपत्र, बेलफल, गन्ना, हलवा-पूरी और पंचमेवा की विशेष आहुतियां दी गईं। इस दौरान महाअष्टमी के शुभ अवसर पर कन्या पूजन का विशेष विधान भी संपन्न हुआ, जहां पूज्य महंत जी ने स्वयं छोटी-छोटी कन्याओं को साक्षात माँ दुर्गा का स्वरूप मानकर उनके चरण वंदन किए, आरती उतारी और उन्हें श्रद्धापूर्वक प्रसादी व दक्षिणा भेंट की। आचार्य पंडित संजय पाठक के निर्देशन में वैदिक विद्वान ब्राह्मणों, वकील शास्त्री, राजू शर्मा, अभिषेक दुबे, विकास मिश्रा, अंकित शर्मा और अभिषेक पाठक की टोली ने समस्त अनुष्ठानों को पूर्ण शास्त्रोक्त विधि से संपन्न कराया।

ये रहे मुख्य यजमान
इस दौरान मुख्य यजमान के रूप में नागेंद्र उपाध्याय, मुकेश रघुवंशी (रजवांस), रघुवीर सिंह रघुवंशी (मास्साब), विजय सिंह रघुवंशी (भिदवासन), एडवोकेट जयंत रघुवंशी, महेंद्र सिंह रघुवंशी (शिक्षक), भानुसिंह ठाकुर, कमल सिंह रघुवंशी (डाबर), झुन्नीलाल रघुवंशी (पचमा) एवं देवेंद्र रघुवंशी ने सहपत्निक शामिल होकर धर्म लाभ अर्जित किया।
आस्था का केंद्र बनेगा पाषाण शिवालय
अनुष्ठान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए महंत राम मनोहर दास जी महाराज ने भक्तों को आशीष देते हुए कहा कि नौलखी धाम में बनने वाला आगामी भव्य पाषाण शिवालय हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए सनातन संस्कृति, साधना और अटूट आस्था का एक अनुपम केंद्र बनेगा। इसी पवित्र और बड़े संकल्प की सिद्धि के लिए पुरुषोत्तम मास में आदि शक्ति माँ भगवती की आराधना और शतचंडी महायज्ञ का आश्रय लिया गया था।
वहीं आचार्य पं. संजय पाठक ने बताया कि पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) में किए गए जप, तप, यज्ञ और पाठ न केवल व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता लाते हैं, बल्कि समाज में किए जाने वाले किसी भी पवित्र संकल्प को निर्विघ्न पूरा करने की आत्मिक शक्ति भी प्रदान करते हैं। समापन के अवसर पर विशाल भंडारे का भी आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया।



