मध्य प्रदेश

Ganj Basoda : भाजपा में गुटबाजी की भेंट चढ़ा शिव-मोहन का कार्यक्रम, खाने के लिए तरसे ग्रामीण

Ganj Basoda BJP : गंजबासौदा में रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहली बार एक साथ पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान दोनों नेताओं का स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने भाजपा नेताओं की गुटबाजी देखने को मिली। कुछ भाजपा नेता और कार्यकर्ता सीएम मोहन के सामने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जिंदाबाद के नारे लगाते हुए नजर आए। कार्यक्रम के दौरान मंच से शिवराज सिंह चौहान ने क्षेत्र की कई मांगें रखीं, जिनमें से कुछ पर मुख्यमंत्री ने तुरंत घोषणा की, जबकि अन्य को प्रस्ताव बनाकर भेजने की बात कही।

भीड़ जुटाने में नाकाम रही भाजपा

लेकिन इस बड़े कार्यक्रम की चमक स्थानीय भाजपा की गुटबाजी के कारण फीकी पड़ गई। नगर भाजपा आपसी खींचतान में उलझी रही, जिसकी वजह से कार्यकर्ताओं और भीड़ को जुटाने में पार्टी बुरी तरह नाकाम रही। कार्यक्रम स्थल की तालियां सरकारी कर्मचारियों, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर ही निर्भर रहीं।

कार्यक्रम में आए ग्रामीण भोजन को तरसे

मंच से बार-बार तालियां बजवाने और “हां” कहलवाने की कोशिशों के बावजूद भीड़ का रिस्पॉन्स बेहद कमजोर रहा। दूर-दराज से बसों में लाए गए ग्रामीण भाषणों के दौरान सोते हुए नजर आए। इसके अलावा भोजन वितरण में अव्यवस्था देखने को मिली, ग्रामीणों को खाने के पैकेट के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। कई ग्रामीणों को तो भूखे पेट कार्यक्रम से लौटना पढ़ा।

पूर्व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री का आया वीडियो

सोशल मीडिया से एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है की कार्यक्रम में अंदर जाने के लिए मध्य प्रदेश विश्वकर्मा कल्याण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष प्रेम नारायण विश्वकर्मा और उनके समर्थकों की पुलिसकर्मीयों से बहस हो रही है। जबकि प्रेमनारायण विश्वकर्मा मध्य प्रदेश विश्वकर्मा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष रहे चुके है। उन्हें राज्य के कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। हालांकि सितंबर में मोहन सरकार ने 13 समाजों के बोर्ड को भंग कर दिया था। जिसमें विश्वकर्मा कल्याण बोर्ड भी शामिल था।

दो गुट आमने सामने!

कुल मिलाकर यह पूरा आयोजन भाजपा की आंतरिक खींचतान और कमजोर मैनेजमेंट की वजह से उम्मीद के अनुरूप भीड़ नहीं जुटा सका। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में दो गुट आमने सामने थे। एक मोहन गुट तो दूसरा शिवराज गुट। दोनों गुटों की आपसी खिंताचानी के चलते कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को मंच तक भटकने नहीं दिया। कार्यक्रम के दौरान कुछ वरिष्ठ नेता मंच के पास जाने के लिए पुलिस से बहस तक करते दिखाई दिए।

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