Ganj Basoda News: जब जागो, तभी सवेरा, नशे के खिलाफ एकजुट गंजबासौदा के 45 संगठन
Ganj Basoda News: गंजबासौदा। शहर में बढ़ते नशे के इस्तेमाल को लेकर अब सामाजिक स्तर पर आवाज बुलंद होने लगी है। युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और शहर को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को प्रेस क्लब गंजबासौदा में शहर के 45 व्यापारिक संगठनों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कई व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर नशे के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया। बैठक में चर्चा के बाद सर्वसम्मति से तय किया गया कि 1 सितंबर 2026 को गंजबासौदा में विशाल नशामुक्ति जनजागरूकता रैली निकाली जाएगी। रैली के जरिए शहर के आम नागरिकों, युवाओं, विद्यार्थियों और अभिभावकों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
संदेश होगा, “नशे को ना,जीवन को हां”
बैठक में मौजूद व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि नशे का असर सिर्फ नशा करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। नशे की लत से परिवार आर्थिक, सामाजिक और मानसिक परेशानियों का सामना करते हैं। ऐसे में इस समस्या से निपटने के लिए केवल प्रशासन या पुलिस पर निर्भर रहने के बजाय समाज के हर वर्ग को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। आयोजकों का कहना है कि 1 सितंबर की रैली को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नशे के खिलाफ सामाजिक अभियान की शुरुआत बनाया जाएगा। इसके जरिए लोगों को नशे से दूर रहने और युवाओं को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने का संदेश दिया जाएगा।
गंजबासौदा में नशे के कारोबार को लेकर सवाल
एक ओर शहर के 45 संगठन नशामुक्ति के लिए एकजुट हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर अवैध शराब और अन्य नशीले पदार्थों की कथित बिक्री को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि शहर के कुछ इलाकों में देर रात तक शराब आसानी से उपलब्ध होने की शिकायतें सामने आती हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि रात 11 बजे के बाद भी शराब की उपलब्धता बनी रहती है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की जांच और कार्रवाई के बाद ही हो सकती है। इसके अलावा शहर में गांजा, अफीम और नशीले इंजेक्शन जैसे पदार्थों के इस्तेमाल और कथित अवैध बिक्री को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। खासकर युवाओं के नशे की गिरफ्त में आने को लेकर अभिभावकों और सामाजिक संगठनों में चिंता बढ़ रही है।
काली पठार और लाल पठार बने अड्डे!
स्थानीय स्तर पर काली पठार और लाल पठार क्षेत्र को नशे के कथित कारोबार से जोड़कर चर्चाएं सामने आती रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि इन क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की बिक्री या सप्लाई की शिकायतें हैं, तो पुलिस और प्रशासन को इसकी गंभीरता से जांच करनी चाहिए। हालांकि, किसी भी क्षेत्र या व्यक्ति पर बिना जांच के नशे के कारोबार में शामिल होने का आरोप लगाना उचित नहीं होगा। ऐसे मामलों में पुलिस की कार्रवाई और आधिकारिक जांच के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
सिर्फ रैली से नहीं, लगातार अभियान से बदलेगी तस्वीर
नशे के खिलाफ रैली को लेकर उत्साह के बीच यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि क्या एक दिन की रैली से शहर को नशामुक्त बनाया जा सकता है? जानकारों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि रैली जागरूकता की शुरुआत हो सकती है, लेकिन इसके बाद लगातार जनजागरूकता, स्कूल-कॉलेजों में अभियान, अभिभावकों की भागीदारी और नशे की अवैध बिक्री पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी होगी। यदि समाज और प्रशासन मिलकर लंबे समय तक अभियान चलाते हैं तो युवाओं को नशे से दूर रखने की दिशा में प्रभावी परिणाम सामने आ सकते हैं।
“जब जागो, तभी सवेरा”
गंजबासौदा के 45 व्यापारिक संगठनों की यह पहल बताती है कि अब शहर के लोग नशे की समस्या को लेकर गंभीरता से सोचने लगे हैं। 1 सितंबर की रैली शहर के लिए सिर्फ एक जनजागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि नशे के खिलाफ सामूहिक संकल्प का संदेश बन सकती है।


