Ganjbasoda News: गंजबासौदा में अमन चैन के साथ गांजा, शराब और नशे का कारोबार, वाह भाई, वाह…
गंजबासौदा में नशे के कारोबार पर पुलिस प्रशासन की निगरानी पर सवाल, रात में गरीबों के ठेले हटाने पहुंचती है पुलिस, लेकिन अवैध शराब और नशे के कारोबार पर कार्रवाई को लेकर लोग पूछ रहे सवाल
Ganjbasoda News, विकास जैन (9977189472): शहर में कानून-व्यवस्था और अमन-चैन को लेकर पुलिस प्रशासन भले ही संतोष जताता हो, लेकिन जमीनी तस्वीर को लेकर स्थानीय लोगों की शिकायतें कई सवाल खड़े कर रही हैं। आरोप है कि गंजबासौदा शहर में गांजा, अवैध शराब और कथित तौर पर ‘टिकट’ जैसे नशीले पदार्थों की बिक्री का कारोबार खुलेआम चल रहा है। बीते दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। वायरल वीडियों में स्टेशन के बाहर स्थित शराब दुकान वाली गली में खिड़की से खुलेआम शराब बेंची देखी जा रही थी।
सबसे बड़ा सवाल…
सबसे बड़ा सवाल स्टेशन रोड स्थित हनुमान मंदिर के सामने संचालित शराब दुकान को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर के सामने शराब दुकान होने से देर रात तक शराबियों का जमावड़ा और हंगामा परेशानी का कारण बनता है। लोगों का यह भी आरोप है कि दुकान बंद होने के समय के बाद भी शराब की उपलब्धता बनी रहती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक जांच की आवश्यकता है।
विरोध के बाद भी नहीं बदले हालात
शराब दुकान को हटाने की मांग को लेकर स्थानीय स्तर पर कई बार धरना-प्रदर्शन किए जाने की बात सामने आई है। कुछ समय पहले एक युवा द्वारा भूख हड़ताल की गई थी। कई दिनों तक शराब दुकान हटाने की मांग उठती रही, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। चुनाव से पहले स्थानीय नेताओं द्वारा भी शराब दुकान हटाने का आश्वासन दिए जाने की चर्चा रही। हालांकि, लोगों का आरोप है कि दुकान हटने के बजाय मुख्य मार्ग से गरीब और छोटे व्यवसायियों के ठेले हटाने की कार्रवाई ज्यादा दिखाई देती है।
गरीबों के ठेले दिखते हैं, नशे का कारोबार क्यों नहीं?
स्थानीय लोगों का सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्रवाई के तरीके को लेकर है। उनका कहना है कि रात करीब 11 बजे पुलिस सायरन बजाते हुए सड़क किनारे सब्जी और ठेला लगाने वाले छोटे कारोबारियों को हटाने पहुंच जाती है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि शहर में नियमों का पालन कराने के लिए इतनी सख्ती है तो अवैध शराब, गांजा और अन्य नशीले पदार्थों की कथित बिक्री पर भी वैसी ही सख्ती क्यों नहीं दिखाई देती? यदि बंद शराब दुकान से निर्धारित समय के बाद भी शराब की बिक्री होने के आरोप हैं, तो इसकी जांच कौन करेगा? यदि शहर की गलियों में गांजा और ‘टिकट’ जैसे नशीले पदार्थों की बिक्री की शिकायतें हैं, तो पुलिस की मुखबिर व्यवस्था और गश्त पर सवाल क्यों न उठें?
‘शहर में अमन-चैन है’… तो फिर ये सवाल किसके हैं?
यदि शहर में अमन-चैन और कानून-व्यवस्था बेहतर होने की बात कही जाती है, तो स्थानीय लोगों की इन शिकायतों का जवाब भी जरूरी है। क्या मंदिर के सामने शराब दुकान और उसके आसपास होने वाले कथित हंगामे की नियमित निगरानी होती है? क्या बंद समय में शराब बिक्री की शिकायतों की जांच हुई है? इन सवालों के जवाब अब जनता मांग रही है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है, अगर गंजबासौदा में सचमुच अमन-चैन है, तो नशे के खुलेआम कारोबार को लेकर उठ रही ये शिकायतें आखिर किसकी जिम्मेदारी हैं?


