Residential Shops Bhopal: 62,500 से अधिक भोपाल में रिहायशी इलाकों की दुकानों पर बड़ा एक्शन!
Residential Shops Bhopal: भोपाल के रेजिडेंशियल एरिया में चल रही कमर्शियल दुकानों और कारोबार पर अब कार्रवाई और ज्यादा कड़ी हो गई है। अब तक लग रहा था कि कार्रवाई कुछ 3-4 हजार दुकानों या प्रॉपर्टी तक सीमित होगी। लेकिन नगर निगम के नए सर्वे ने पूरा आंकड़ा ही बदल दिया है। क्योंकि ये संख्या 3 हजार… 4 हजार नहीं… बल्कि करीब 62 हजार 500 प्रॉपर्टी तक पहुंच गई है। जी हां, 62 हजार 500 ऐसी प्रॉपर्टी चिन्हित हुई हैं, जहां रिहायशी इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटीज चल रही हैं।
नोटिस देने की तैयारी
सबसे बड़ी बात ये है कि पहले नगर निगम ने सिर्फ करीब 1 हजार प्रॉपर्टी का सर्वे किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सर्वे का दायरा बढ़ाया गया और अब आंकड़ा 62 हजार 500 तक पहुंच गया है। यानी आने वाले दिनों में भोपाल के कई रिहायशी इलाकों में चल रही दुकानों, ऑफिस, गोदाम और दूसरे कारोबार पर निगम की नजर रहने वाली है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर भोपाल के रेजिडेंशियल एरिया में इतनी बड़ी संख्या में कमर्शियल गतिविधियां पहुंचीं कैसे? और कौन- कौन से इलाके सबसे ज्यादा खतरे में हैं?
दरअसल, भोपाल के रिहायशी इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी का मामला काफी समय से विवाद में है। रेजिडेंशियल बिल्डिंग का इस्तेमाल अगर दुकान, ऑफिस, गोदाम या किसी दूसरे व्यावसायिक काम के लिए किया जा रहा है, तो ये नियमो के विरुद्ध है। अब निगम ने नोटिस देना भी शुरू कर दिया है। बुधवार को ही 557 प्रॉपर्टी को नोटिस दिए गए। नरेला में सबसे ज्यादा 264 नोटिस दिए गए।
इसके बाद हुजूर में 125, गोविंदपुरा में 76, मध्य में 50, उत्तर में 30 और दक्षिण में 12 नोटिस दिए गए। यानी एक ही दिन में कुल 557 नोटिस जारी किए गए। इस काम के लिए नगर निगम ने 20 टीमें बनाई हैं। हर टीम में 4 लोग हैं। यानी करीब 80 अधिकारी-कर्मचारी इस काम में लगाए गए हैं। टीमें इलाकों में जाकर देख रही हैं कि कौन-सी जगह घर के नाम पर है और वहां किस तरह का कारोबार चल रहा है।
अब समझिए जरूरी बात
62 हजार 500 प्रॉपर्टी चिन्हित होने का मतलब ये नहीं है कि सभी 62 हजार 500 दुकानों को तुरंत बंद किया जा रहा है। पहले जांच होगी। लोगों से जरूरी कागज मांगे जाएंगे। फिर देखा जाएगा कि वहां चल रहा कारोबार नियम के हिसाब से है या नहीं। इसके साथ ये भी देखा जाएगा कि… घर का नक्शा पास है या नहीं? बिना अनुमति कोई निर्माण तो नहीं हुआ? पास हुए नक्शे से अलग निर्माण तो नहीं किया गया? और कहीं कब्जा तो नहीं किया गया? यानी अब सिर्फ दुकान पर नहीं, पूरी प्रॉपर्टी पर नजर है। नगर निगम मुख्य सड़कों के साथ-साथ उनसे जुड़ी गलियों में भी जांच कर रहा है। इसके अलावा नदी और तालाब के किनारे बने भवन, ग्रीन बेल्ट, बफर जोन और कैचमेंट एरिया में बने निर्माण भी जांचे जाएंगे।
दुकानदारों में बढ़ी टेंशन
अवैध मैरिज गार्डन भी इस जांच में शामिल हैं। पहले भी 1,018 नोटिस दिए जा चुके निगम इससे पहले भी कार्रवाई कर चुका है। जुलाई के आखिरी हफ्ते तक 1,018 नोटिस दिए जा चुके थे। इसके बाद 9 से 12 अगस्त के बीच 1,163 और नोटिस दिए गए। अब बुधवार के 557 नोटिस भी इसी कार्रवाई का हिस्सा बन गए हैं। दुकानदारों में भी टेंशन बढ़ गयी है। निगम की सख्ती के बाद रिहायशी इलाकों में दुकान चलाने वाले कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।
दुकान की तलाश में जुटे दुकानदार
अवधपुरी, अयोध्या बायपास, गौतम नगर, अशोका गार्डन और लालघाटी जैसे इलाकों में कुछ दुकानदार अब कमर्शियल इलाके में दुकान तलाश रहे हैं। यानी लोग पहले से ही ये सोचने लगे हैं कि अगर नोटिस आया तो कारोबार कहां शिफ्ट करेंगे। तो फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने भी कार्रवाई तेज करदी है। अब देखना होगा कि इस जांच के बाद कितनी प्रॉपर्टी नियमों के मुताबिक निकलती हैं और कितनों पर आगे कार्रवाई होती है। और सबसे बड़ा सवाल—क्या सिर्फ दुकानों पर कार्रवाई से समस्या खत्म होगी, या भोपाल को एक नए मास्टर प्लान की भी जरूरत है?



