मध्य प्रदेश

MLA Jaivardhan Singh : बेटियों-महिलाओं पर अत्याचारों की भयावह तस्वीर पेश करता मध्य प्रदेश

MLA Jaivardhan Singh : किसी भी राज्य की स्थिति और उसके विकास को महिलाओं और बेटियों की वास्तविक स्थिति जाने बिना नहीं मापा जा सकता। महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षणिक भागीदारी ही यह तय करती है कि कोई देश या प्रदेश सच में कितना आगे बढ़ा है।

ऐसे में मध्य प्रदेश, जहाँ महिलाओं और बच्चियों की आबादी लगभग 4.29 करोड़ है, जो प्रदेश की कुल जनसंख्या का 48–49 प्रतिशत है, वहाँ महिलाओं और बेटियों का विकास हर क्षेत्र में बराबरी से होना चाहिए था।

लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है। आज मध्य प्रदेश महिला उत्पीड़न, यौन शोषण और बेटियों के गायब होने के मामलों में देश के शीर्ष राज्यों में गिना जाने लगा है।

जहाँ एक ओर खुद को “बहनों का भाई” और “बेटियों का मामा” बताने वाले शिवराज सिंह चौहान (मामा) के लगभग 18 वर्षों के मुख्यमंत्री कार्यकाल में मध्य प्रदेश बलात्कार के मामलों में टॉप राज्यों में शामिल रहा, वहीं दूसरी ओर आज, बीते दो वर्षों में, न मामा न भाई—केवल प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में मध्य प्रदेश बेटियों के गायब होने के मामलों में शीर्ष पर पहुँच चुका है। दोनों ही सरकारों ने अपने-अपने कार्यकाल में महिलाओं को केवल भाषणों, वोट बैंक और विकास के खोखले दावों तक सीमित रखा।

वास्तविक स्थिति से परिचय आपको हैरान और परेशान कर देगा।

आँकड़े क्या कहते हैं?

NCRB (नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो) की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश महिलाओं और बच्चियों के विरुद्ध अपराधों में देश में सबसे आगे है। आज हालात यह हैं कि रोज़ाना महिलाओं और बच्चियों के गायब होने की घटनाएँ सामने आ रही हैं। प्रदेश से अब तक लगभग 2.5 लाख लड़कियाँ गायब बताई जा रही हैं।

कुछ प्रमुख आँकड़े इस प्रकार हैं—

290+ मामलों में महिलाओं के साथ बलात्कार के आरोपी पुरुष

280+ मामलों में नाबालिगों से बलात्कार के आरोपी

600 से अधिक यौन अपराधों के आरोपी अब भी फरार

राज्य में दहेज के कारण होने वाली मौतों की संख्या भी चिंताजनक है, जो यह दर्शाती है कि कानूनी प्रतिबंधों के बावजूद यह सामाजिक बुराई आज भी गहराई से मौजूद है।

NFHS के आँकड़े बताते हैं—

केवल 65.4% महिलाएँ ही पढ़-लिख सकती हैं।

15–49 आयु वर्ग की केवल 29.3% महिलाओं ने 10 या उससे अधिक वर्षों की स्कूली शिक्षा प्राप्त की है।

डिजिटल पहुँच: सिर्फ 26.9% महिलाओं ने कभी इंटरनेट का उपयोग किया है, जो गहरे डिजिटल डिवाइड को दर्शाता है।

ख़बरें जो रूह कंपा देती हैं

आँकड़ों से आगे बढ़ें तो रोज़ अख़बारों में आने वाली ख़बरें हमारी बेटियों की भयावह स्थिति बयान करती हैं—

जबलपुर में नौकरी का झांसा और इंटरव्यू देने बुलाया  कॉलेज बाबू ने सामूहिक बलात्कार किया।

इंदौर में पति द्वारा प्रताड़ित पत्नी ने 5 माह के बेटे को गोद में लेकर एसिड डाल लिया।

भोपाल में दुष्कर्मी को जमानत मिलती हैं रिहा होने के बाद वो पीड़ित पर एसिड फेक देता है।

छतरपुर में दुष्कर्म के मामले में फरार चल रहा अपराधी ने पीड़ित सहित उनके दादा, एवं चाचा को गोली मारी।

राजगढ़ में 75 नाबालिक दुल्हनें बनीं मां 52 ने जन्मे 53 कुपोषित बच्चे , 10 की तो 30 दिन में मौत हो गई, कई बच्चे इत्ते कुपोषित की वजन सिर्फ 400 ग्राम।

मंदसौर में देह व्यापार में लिप्त 8 नाबालिक, 3 महिलाएं, और 2 पुस्र्ष पकड़े जा चुके हैं

सागर, खुरई पूर्व गृहमंत्री की विधानसभा में नदी में नहाने गई नाबालिक से 2 लड़कों ने किया दुष्कर्म

स्कूल जा रही बच्ची के साथ अध्यापक द्वारा बलात्कार।

अपने चाचा के घर जाते समय नाबालिग बच्ची का अपहरण कर सामूहिक बलात्कार।

इस भयावह स्थिति को बदलने के लिए सरकार को सिर्फ़ बयानबाज़ी नहीं, बल्कि कठोर और निर्णायक कदम उठाने होंगे—

महिला आरक्षकों की भर्ती कम से कम दोगुनी की जाए।

हर गली, मोहल्ले और चौराहे पर महिला पुलिस की तैनाती सुनिश्चित की जाए।

यदि इसके बाद भी सुधार नहीं होता, तो एल साल्वाडोर जैसे देशों की तरह सख़्त क्राइम कंट्रोल मॉडल अपनाने होंगे।

यौन अपराधियों के लिए अलग, विशेष और अत्यंत कठोर जेल व्यवस्था (सी-कोट जैसी) बनाई जाए, ताकि अपराध करने का विचार आते ही रूह काँप जाए।

अब समय आ गया है कि बेटियों और महिलाओं को सिर्फ नारों में नहीं, बल्कि हकीकत में सुरक्षा, सम्मान और बराबरी दी जाए।
क्योंकि बेटियाँ सुरक्षित होंगी, तभी प्रदेश सच में प्रगतिशील होगा।

लेखक: जयवर्धन सिंह, पूर्व मंत्री, विधायक राघौगढ़

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