America-Iran war : पिछले 40 दिनों से दुनिया को दहला देने वाली अमेरिका-ईरान जंग पर आखिरकार अस्थायी विराम लग गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच दो सप्ताह के संघर्षविराम पर सहमति बन गई है। इस समझौते ने न केवल खाड़ी देशों में शांति की उम्मीद जगाई है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी बड़ी राहत दी है।
ट्रंप की चेतावनी और समझौते की इनसाइड स्टोरी
सीजफायर के ऐलान से कुछ समय पहले तक राष्ट्रपति ट्रंप के तेवर काफी कड़े थे। उन्होंने ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ से जहाजों को सुरक्षित रास्ता नहीं मिला, तो वे ईरान की सभ्यता तक मिटा देंगे। हालांकि, कूटनीतिक दबाव के बाद ट्रंप ने अपने कदम पीछे खींचे। यह डील पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख की अपील व मध्यस्थता के बाद संभव हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आखिरी समय में चीन के हस्तक्षेप ने दोनों देशों को मेज पर आने के लिए मजबूर किया।
सीजफायर की शर्तें
पाकिस्तान द्वारा प्रस्तावित इस समझौते को ईरान ने स्वीकार कर लिया है। इसकी मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं। अमेरिका और इजराइल ईरान पर हमले बंद करेंगे, बदले में ईरान भी अपनी सैन्य कार्रवाई रोकेगा। ईरानी सेना की मदद से होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस के जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। यह संघर्षविराम लेबनान सहित जंग से प्रभावित अन्य सभी क्षेत्रों में भी लागू होगा।
‘जंग रुकी है, खत्म नहीं हुई’
ट्रंप के ऐलान के महज दो घंटे बाद ईरान के सुप्रीम लीडर ने अपनी सभी सैन्य इकाइयों को तुरंत फायरिंग रोकने का फरमान जारी कर दिया। ईरान के सरकारी न्यूज़ चैनल (IRIB) पर जारी बयान में कहा गया कि सेना निर्देशों का सख्ती से पालन करे। हालांकि, ईरान ने यह भी साफ कर दिया कि यह केवल एक अस्थायी कदम है, जंग का पूर्ण अंत नहीं।
इस्लामाबाद में होगी महाबैठक
शांति बहाली की दिशा में अगला बड़ा कदम 10 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में उठाया जाएगा। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि आमने-सामने बैठकर विवादों का स्थायी समाधान खोजने की कोशिश करेंगे। पाकिस्तान को उम्मीद है कि इस वार्ता से मध्य-पूर्व (Middle East) में स्थिरता आएगी।



