PM से सम्मानित, आंकड़ों में अव्वल, फिर भी सरकारी प्रयोगों से क्यों परेशान मप्र के तहसीलदार?

MP Tehsildar News : एक ओर जहां मध्य प्रदेश की ‘साइबर तहसील’ पहल को स्वयं प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश ‘फार्मर रजिस्ट्री’ के तहत फार्मर आईडी बनाने में गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को पीछे छोड़कर देश में अव्वल है। इन सभी सफलताओं के पीछे प्रदेश के तहसीलदार और नायब तहसीलदारों का अथक परिश्रम है, जो अब सरकार के नए प्रयोगों से नाराज हैं।
राजस्व महा-अभियानों के तहत नामांतरण, बंटवारा और नक्शा तरमीम जैसे लगभग 80 लाख प्रकरणों का निराकरण किया गया है। यह आंकड़े जमीन पर हो रहे उत्कृष्ट कार्य की गवाही देते हैं। जब प्रदर्शन की तुलना वरिष्ठों से होती है, तो तस्वीर और भी साफ हो जाती है। आंकड़े बताते हैं कि *तहसीलदार न्यायालयों का प्रकरण निराकरण प्रतिशत 72.55% है, जबकि **SDM का 60.27%* और *कलेक्टरों का केवल 32.68%* है।
यह असाधारण प्रदर्शन तब है जब प्रदेश में राजस्व अधिकारियों की भारी कमी है। कुल 1626 आवश्यक अधिकारियों के मुकाबले केवल 1456 अधिकारी कार्यरत हैं, जो शव पंचनामा और कानून-व्यवस्था जैसे दर्जनों अन्य गैर-न्यायालयीन दायित्व भी निभा रहे हैं।
इस शानदार प्रदर्शन के बावजूद, सरकार द्वारा लाए गए न्यायिक/गैर-न्यायिक कार्य विभाजन के फैसले से अधिकारियों में भारी रोष है। उचित मंचों पर कई बार अभ्यावेदन और अनुरोध करने के बावजूद, राजस्व अधिकारियों की वास्तविक चिंताओं को किसी ने नहीं सुना। इसी के चलते कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने “आर-पार की लड़ाई” का निर्णय लिया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब तहसीलदार कम संसाधनों में राष्ट्रीय पुरस्कार जीत रहे हैं और रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन कर रहे हैं, तो सरकार उन पर ऐसे अव्यवहारिक प्रयोग क्यों थोप रही है? यह नीति आंकड़ों को नजरअंदाज कर न केवल सबसे कुशल अधिकारियों को हतोत्साहित कर रही है, बल्कि जनता के काम में भी सीधा गतिरोध पैदा कर रही है।



