मध्य प्रदेश

Jabalpur High Court Orders : प्रदूषण बोर्ड को सख्त आदेश, रिपोर्ट पर करे सुधार , 9 फरवरी को अगली सुनवाई

MP High Court: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पर्यावरण से जुड़े एक महत्वपूर्ण जनहित मामले में सख्त रुख अपनाते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने दो टूक कहा है कि पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी और संबंधित पक्षों को तुरंत कार्रवाई करनी होगी।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश संजय सचदेवा एवं न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने पारित किया। न्यायालय को अवगत कराया गया कि 5 दिसंबर 2025 को मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने संबंधित स्थल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद तैयार रिपोर्ट में कई गंभीर कमियों और पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन की बात सामने आई थी, साथ ही आवश्यक सुधारात्मक सुझाव भी दिए गए थे।

सुधार कार्यों पर तत्काल अमल के निर्देश

हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि समिति द्वारा प्रतिवादी क्रमांक-5 मेसर्स लाइवस्टॉक फूड प्रोसेसर्स प्राइवेट लिमिटेड के लिए सुझाए गए सभी सुधारात्मक उपायों को बिना देरी लागू किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट के अनुरूप त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

वैधानिक अनुमति पर दो दिन में फैसला

अदालत ने यह भी कहा कि यदि सुधार कार्यों के लिए किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति आवश्यक हो, तो संबंधित एजेंसियां तुरंत आवेदन प्रस्तुत करें। साथ ही, सक्षम प्राधिकरण को निर्देश दिए गए कि ऐसे आवेदनों पर दो दिन के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लिया जाए।

रिटेनिंग वॉल और सीसीटीवी को लेकर पूर्व आदेश

कोर्ट ने यह भी दोहराया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सुझाई गई रिटेनिंग वॉल (संरक्षण दीवार) यदि किसी शासकीय एजेंसी द्वारा बनाई जानी है, तो संबंधित विभाग तत्काल कदम उठाए। उल्लेखनीय है कि 8 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट ने भोपाल स्लॉटर हाउस में दीवार निर्माण और लाइव सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के आदेश भी दिए थे।

पक्षकारों का विवरण

इस मामले में याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से दयोदय महासंघ, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ और जन जागृति समिति शामिल हैं। वहीं प्रतिवादी पक्ष में मध्यप्रदेश शासन (शहरी प्रशासन विभाग), राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग समिति (बूचड़खाने), मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम भोपाल और मेसर्स लाइवस्टॉक फूड प्रोसेसर्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

याचिकाकर्ताओं ने पर्यावरण प्रदूषण और नियमों के उल्लंघन से जुड़े गंभीर मुद्दे अदालत के सामने रखे थे, जिन्हें कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए कड़े निर्देश जारी किए। मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है। न्यायालय का यह आदेश पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक अहम संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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